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मेरे शब्द
आनाकानी
करते है
कागज पर
उतरने से,
जहन में
भरने से,
अर्थों में
ढलने से ,
सपनों में
पलने से
आंसूओं में
घुलने से

मेरे शब्द
आनाकानी
करते है
चुप सा
रहने में,
निरर्थक
कहने में
दीवार सा
ढहने में
तिरस्कार सा
सहने में
नाली सा
बहने में

मेरे शब्द
आनाकानी
करते है

Bharat Singh
Writer & entrepreneur

मेरे शब्द आनाकानी करते है कागज पर उतरने से, जहन में भरने से, अर्थों में ढलने से , सपनों में पलने से आंसूओं में घुलने से मेरे शब्द आनाकानी करते है चुप सा रहने में, निरर्थक कहने में दीवार सा ढहने में तिरस्कार सा सहने में नाली सा बहने में मेरे शब्द आनाकानी करते है Bharat Singh Writer & entrepreneur

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Writing by

bharat singh

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