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writingWah bhoot vale din the

वह भूतवाले दिन थे
जब भूत के पैर उल्टे होते थे,
अंधेरे में आता था
सुबह होते ही भाग जाता था।
सबके अपने भूत होते थे
रात में जुआ खेलने आता था
हमेशा हारता था
लोगों को मालामाल कर जाता था,
उसके पास बहुत धन होता था,
कम होने से बैंक से निकाल लेता था।
वह हमारी रातों का रोमांच था,
बीड़ी जलाता,
धान कूटता,
उसे कभी नशे में नहीं देखा,
रास्ते में आगे नहीं पीछे चलता था,
भूतों के भी अपने अड्डे होते थे,
श्मशान वाले भूत नाचते थे,
कब्रिस्तान वाले गप्प मारते थे।

*महेश

वह भूतवाले दिन थे जब भूत के पैर उल्टे होते थे, अंधेरे में आता था सुबह होते ही भाग जाता था। सबके अपने भूत होते थे रात में जुआ खेलने आता था हमेशा हारता था लोगों को मालामाल कर जाता था, उसके पास बहुत धन होता था, कम होने से बैंक से निकाल लेता था।

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Writing by

MaheshRautela

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