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पहाड़ का विद्यालय:यह पहाड़ की बात हैपहाड़ का विद्यालयअलग गूंज लिये होता है।ठंड के दिन,धूप की ललकपहाड़ी पर धूप छिड़कावधूप के बीच लड़के-लड़कियांकेवल धूप के लिये नहींप्यार के लिये भी बैठे हैं।बड़े-बड़े आँखों वाली लड़कीदेखती है गहरे बादलों कोबगल में सुदृढ़ पेड़ों कोआकाश के चारों कोनों कोएक लम्बी दृष्टि आँखों कीएक जगह नहीं बैठती है,चिड़ियों की तरह उड़आकाश को तिरछा कर देती है।वहाँ बैठा लड़काअब अपलक हो चुका है,उसकी हँसी छिपते सूरज की तरहमद्धिम हो चुकी है,उड़ती दृष्टियां मिल करअलग बैठ चुकी हैं।ये लड़कों के समूहये लड़कियों के समूहझील में तैरते पक्षियों की तरहसरल हो चुके हैं।अगले महीने चुनाव होंगेऔर सभी तितर-वितर होकलात्मक होने लगेंगे।पृष्ठ बदलते हैंप्यार का तापमानधूप के तापमान की तरह गुनगुना होने लगता है,पढ़े-लिखे ऐसे ही होते हैं।एक घंटे का समय हैपर, समय परपरंपरा की दीवार है,अभेद्य हिचकिचाहट,दस-बीस बार दृष्टि टक्करातीवापस आती है।दो बरस गुजरने को हैंहर दिन दोनो आते हैंकंकड़ उठाआकाश में उछाल देते हैं,हल्की सी धूप तापकरबंद पुस्तकों के पृष्ठों को दबाकुछ आगे, कुछ पीछे देखहैरान से ,पहाड़ के विद्यालय मेंअलग गूंज लिये होते हैं।बर्फ गिर चुकी हैबर्षा झील को भर चुकी हैपरिवर्तन की बयार अभी दूर हैदेवी-देवताओं से विभेद हैं,क्षण जो जिये धूप मेंठिठके से , जीवन के अंदरअलग गूंज लिये होते हैं।**महेश रौतेला

pahar kaa vidhyalay

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 pyaar ki vjahdekha tujhejab se dil ne meretera ho gya hai deewanaaashiq nahi tha m kabhiaab aashiqi ko jaana..2fursat nahi hai dil ko mereaadat teri ho gai hai,rate meri ye kati nahitu khabon se jaati nahi haipehle kabhi to esa na thaab jarurat teri ho gaidekha tujhejab se dil ne meretera ho gya hai deewanaakela khada tha khamoa satab tune mujhe ko sambhalabhatka hua musafir the metere pyare n sanwara ,andhero bhari thi duniyaa meritere dam se roshan ye deewana..aashiq nahi tha m kabhiaab aashiqi ko jaana..2]dekha tujhejab se dil ne meretera ho gya hai deewanaaashiq nahi tha m kabhiaab aashiqi ko jaana..2

pyaar ki vjah

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pichkaari……!!mori  kori umariya rang dali sarisawariya ne jo preet ki maari pichkaaridhadkanon ko manayein ya sasein sambhaleinisko samjhaaun ke uski samjhoon mein bolihonnt bhool gaye haseen aur nain muskayienajab mantar hain tere gajab ki jaadugariji mein rehtey bhi ho ji churatey bhi hoye kaisi hai shararat ye kaisi hera pherimadhavan.jhyderabad  .   india  . lyricsmail@gmail.comtukdey kuch kaagaz ke ye zindagi bayan kertein hain ya phir...!!ye zindagi he hai, jo kagaz per bikhri padi hai...!!

pichkari

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तुम आओ तो साथ चलेऐसे कोई बात नहीमैं रोज अकेला चलता हूँहर शाम मेरी गहराती हैबाहर भी और अंदर भीमैं दीपक रोज जलाता हूँबाहर भी और अंदर भीतुम आजाओ तो रोशन होबाहर भी और अंदर भीऐसे कोई बात नहीमैं दीपक रोज जलता हूँहर सुबह मेरी तन्हाई कीरोज शिकायत करती हैवो सूखी है वो निष्ठुर हैवो रात उठाये फिरती हैवो दिन में दिन सी देती हैतुम आओ तो देखू तोसुबह मेरी क्या कहती हैऐसे कोई बात नहीहर शाम मेरी गहराती हैहर सुबह मेरी उठ जाती हैमैं यू भी चलता रहता हूँतुम आओ तो साथ चलेऐसे कोई बात नहीमैं यू भी चलता रहता हूँ

come with me

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कान पर बंदूक रखपूछा किसी ने धर्म क्या है तुम्हाराउनके चेहरे नही थेकाले समतल गोले कुछरक्खे हुए थे धड़ो परकान आंखे नाक मुह सबगिर गए थेवो जो कुचला सा पड़ा हैसोचता है क्या बताऊँ धर्म क्या है मेरा

dharm

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yunn toh mohabbat iktarfaa tha, dil me ek hangama sa barpaa thaitni justt-juu se unhe paane ki chahat paal rakhi thi, har saans me unki shifarish daal rakhi thi..har mandi-masjid sirr jhukaya tha, har sajdey me bas unka hi naam aaya tha..falak pe sitaroon se mulaqat hui thi, uss dil shehar me rimjhim barsaat hui thithi woh pehli nazar ki pehli qayamat, mere har subah ki woh pehli ibaadat..jaise thi woh kisi shayer ki pehli ghazal, kisi banzar jamii'n pe nayi si fasal..unn lamho ki silwaton me, tanha raaton ki karwaton me,har dafa chahat ka suroor tha, mera nahi ye iss dil ka kasoor thahar lafz yunn hi pighalti gayi, har shaam tanha dhalti gayi,har safar zindagi chalti gayi, woh manzar dil me khalti gayi..khuda v sochta tha kaisa hai ye aashiqana, har roj sanam ki yaad me likhta ye afsana..tha woh bas chahat ka ek chota sa nazrana, har roj jala sitam me dil mera begana..maine kaha tha fursat me baith k meri chahat ko aazmana..ho sake toh agley saavan jaldi ghar laut aana...ho sake toh agley saavan jaldi ghar laut aana   .  . . .!!!

agley saavan jald..

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कांटेमैंने कांटो से कब गिला की थी,मैंने फूलो को कब बुलाया थातुमने जब वो गुल हँसके हाथ में दियाएक काँटा खुद ही साथ आया था ,गुल वो मुरझा गया बस दो पल हँसकेसो हमने उस कांटे से दिल लगाया था ,वो दर्द बन के साथ है अब तकजो हाथ से तेरे गुल के साथ,भूले से मेरे हिस्से आया थाहमने हर दर्द गुल की यादो का,काँटों से खुद अपनी रूह में लगाया थाआज हम गुमसुम नहीं है,दर्द की तेज लहरे हमे बहला रही हैहमारी मुहबत दर्द बन के ताउम्र का,वफ़ा की मंज़िल पा रही है।

kaante

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सोने का बिस्तर चांदी की रातेना आँखों में सपने ,ना पहले सी राते,कोई  हाथ हाथो में है तो  मगरनहीं उनके  होंठो पे जन्मो की बाते ,ये क्या पा लिया है,जो खुश  है सभीहक़ तक मेरा मुझको मिला ही  नहीं,तनहा बहुत दर्द सहते है परलगता है अब हम बिखर जाएँगे,मुझे पार जाना है जीवन नदी केतेरे बिन नहीं हम निकल पाएंगेये कैसा नगर है? क्या ये हमसफ़र है ?फ़साना ये किसको बता पाएंगेआ जाओ ना तुमपे सिर्फ़ हक़ था  मेरातक़दीर का थे  तुम मेरी फलसफामगर सो गए तुम ,कहि खो गए तुम बरसो आँखो में नींदे नही,तेरे साथ अब हम भी सो जाएँगेमर के ही अब हम सुकून पाएंगे,सच्चा सा एक रिश्ता जी जायेंगेजन्मो के साथी से मिल जायेंगे,कितने तनहा से जीते है हमरूह में तेरी सुकून पाएंगे ,अरमा मेरे सब निकल जायेंगे।

golden bed

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लो मिल गयी मुझे फिर  मेरी भूली  हुयी वो हसरतएक याद जिसे मिटाने की हम कर  ना सके जुर्रतमिला लिपटा हुआ लिफाफा इन कैसी खुश्बुओ मेंआज भी हम गुम है जिसकी एक टूटी आरज़ू मेये है वही तस्वीर उनकी जो दिल से नहीं मिटी हैउफ़ ,आज उनके हमको कैसे दीदार हो रहे हैहम होश में भी है और होश गुम से भी हैये कैसी आग है ,जो कही भी न जल  रही हैपर गरमी से इसकी मेरी हस्ती पिघल रही है ,यहाँ है बला की रौनक ,मेले लगे हुए हैहम फिर भी क्यों बताओ तन्हा खड़े हुए हैसज़दे में अपने प्यार के झुक कर यूँही पड़े हैजाने क्यों कोई आवाज़ हम तक ना पहुँचती हैजाने क्यों अभी भी मंज़िल हमको नहीं मिली हैलाखो के हाथ हमको ऐसे बुला रहे हैहम चाहतो में उनकी ,यूँ बेक़रार से है जैसे की आज खुद ही हम नीलाम हो रहे हैलो पाने की तुमको चाहत ,बर्बाद कर गयी हैरूह में अपनी खुद ही खंजर चुभा लिए हैलोग कहते हैं यु मिट के ,हम तुमको पा गए है

yaad

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कोई जब कभी अपना कह कर पुकारे ,लफ्ज़ो से रिश्तो को फिर से सँवारे ,अगर अजनबी वो  तेरा नाम ले के,अल्लाह के सजदों में तुमको पुकारे।।थाम लेना हाथ उनका बिना कुछ विचारे ,न जाने कहाँ  किसको ,किससे मिलेंगे सहारे ,ना फूलो को चुनना ,तुम कांटो पे चलना ,क्या पता  जीवन नदी से वही पार तुमको उतारे।।ये जीवन नदी है ये रुकती नहीं है ,बहुत मोड़ है लाखो तूफान भरे है,मगर जब सहारा हो पतवार भी तो,भंवर में भी नैया हम अपनी उतारे।।ये धागे हैं कच्चे मगर ये ना टूटे ,ये विश्वास की कोपलों से बने है ,ना शब्दों की कश्ती ना रस्मो के बंधन,समझ आया वो मेरे और हम उनके लिए है..   बीते युगो से वो एक नाम ले कर ,दोनों ही हम मिलते बिछड़ते रहे है ,दीवानी थी राधा ,मीरा सखी थी ,मुहब्बत के किस्से नए शब्द ले कर  यूँही फ़िज़ा में बिखरते रहे है।..

muhabbat

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याद है==========याद हैजो चाहने वाले को बहुत क़रीब ले आती हैयाद हैजो प्यार करने वाले के पास चली जाती हैयाद हैजो किसी को किसी का मुरीद बनाती हैयाद हैजो सज- सँवर आईने में  मुस्कराती हैयाद  हैजो तन्हाई में भी किसी के गीत गुनगुनाती हैयाद हैजो किसी को कभी भुला नहीं पाती हैयाद हैजो किसी की बेहतरी के लिए उसको भूल जाती हैयाद हैयाद जो याद सी मशहूर हैयाद हैहाँ, सिर्फ़ यादजो मुझसे तुम्हारी तरह हरदमहँसकर मिलती ज़रूर है

yaad hai

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कुछ लम्हे तुमको लिखते हैं=================कुछ लम्हे तुमको लिखते हैंकुछ लम्हे तुमको  पढ़ते हैंकुछ लम्हे तुमको साथ लिएसाँसों की किताब में छपते हैंकजरारी तुम्हारी आँखों सेचँदा जब फ़लक पे चमकता हैअँधेरे में डूबे तारे भीइश्क़  का मतलब समझते  हैंरौशनी  में नहायी रात रुपहलीहर दिल को तब छू लेती हैजब कोमल कलियों के घूंघटधीरे-धीरे खुलते हैंनभ के प्रेम में डूबी धरतीसुबह का गीत जब गाती हैपुलकित प्रकाशमयी सूरजपूरब  दिशा में उगते हैं  कुछ लम्हे तुमको लिखते हैंकुछ लम्हे तुमको  पढ़ते हैंकुछ लम्हे तुमको साथ लिएसाँसों की किताब में छपते हैं

kuch lamhe tumko ..

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itne chehron me ek lajawaab dekhauski har adaa me apna khwaab dekhayun toh gul fiza me beshumar khile hain,meri nazar ne ek hi gulaab dekha.uski har adaa.....chaand sitaron se ronak hai falak me,is zameen ki jo ronak, wo aaftab dekha.uski har adaa.....poocha nahi nazron ne ek sawaal bhi lekin,un shokh nigaahon me har jawaab dekha.uski har adaa.....kaise kahen us naazni ke ho gaye kaayal,hasraton me jo shamil hai, wo shabaab dekha.uski har adaa.....hothon pe dilkashi hai, nigaahon me aashiqui,dil me uske pyaar ka sailaab dekha.uski har adaa.....kya khoob hai kashish uske rukh me doston,khud ko bhi pehli dafa betaab dekha.uski har adaa.....kabhi koi pooche toh ye jawaab salona,shaayri ka nasha usme behisaab dekha.itne chehron me......uski har adaa me....

hasrat e dil

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itne chehron me ek lajawaab dekhauski har adaa me apna khwaab dekhayun toh gul fiza me beshumar khile hain,meri nazar ne ek hi gulaab dekha.uski har adaa.....chaand sitaron se ronak hai falak me,is zameen ki jo ronak, wo aaftab dekha.uski har adaa.....poocha nahi nazron ne ek sawaal bhi lekin,un shokh nigaahon me har jawaab dekha.uski har adaa.....kaise kahen us naazni ke ho gaye kaayal,hasraton me jo shamil hai, wo shabaab dekha.uski har adaa.....hothon pe dilkashi hai, nigaahon me aashiqui,dil me uske pyaar ka sailaab dekha.uski har adaa.....kya khoob hai kashish uske rukh me doston,khud ko bhi pehli dafa betaab dekha.uski har adaa.....kabhi koi pooche toh ye jawaab salona,shaayri ka nasha usme behisaab dekha.itne chehron me......uski har adaa me....

hasrat e dil

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galte alfazo se.. uthti tammannao k bich.. chand bhi sharmaya ke chandni ataa ho gyi..chubhti rahon pe chalte hue phoolon ne suna jo muskurahat dil pe ada ho gyi..zidd pe ade dil ki zubanon k khatir adayen bhi kuch haya ho gayi..na kehne ki zarurat padi na sunne ka mauka mila..ye daastan to ankhon se bayaan ho gyi..

aankhen sab keh j..

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जानता हूँ ये भुलावा है।पर अच्छा है ये है।निपट गहरे द्वंद के बादमैं फैसला नही करता बल्किखो जाता हूँ बुलबुलो में।बुलबुलो में आशाओ केसुखों के दुखों केतैरता रहता हूं बेसुधयह ये द्वंद हैभुलावा हैबेमतलब ही सहीचलने का बहाना तो हैकही को आना तो हैकही से जाना तो हैखुद ही को ढूंढने मेंखुद को मिटा दू तो क्या हैइसी तलाश मेंखुद से मिलू बनता चलूँफिर आदि क्या अंत क्याकुछ नहीबस सफर हैंऔर अच्छा है ये है।।

bhulawa

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प्रलय का इंतजारक्यों इंसान हैवान बनता जा रहा हैसंत कहते हैं ये कलयुग की निशानी हैइतिहास कहता है ये रीत पुरानी हैइसी दिन का हमें इंतजार था क्याये 'आज' इतना डरावना है तो, ज़रा सोचोहमारा कल कितना भयानक होगाजिनके सपनों मे परियों की जगहआज शैतानों ने बस्ती बना ली हैक्या वो नन्हे फरिश्ते हमारेअपना कल चैन से जी पाएँगेजिन बच्चों को शैतान आज रौंद रहे हैंवो अपने भविष्य को क्या देकर जाएँगेकदापि नही! उनके मन मे तोरोज नये बवंडर उठते होंगेजिसकी हम कल्पना भी नही कर सकतेरात दिन दिल से आँसू निकलते होंगेऔर हमे नज़र भी ना वो आते होंगेनज़र भी कैसे आएँ उनके आँसूहमने आँखों पर पट्टी जो बाँधी हैकाश धरती पर फिर से प्रलय आ जाएऔर सभी काले मन वाले दरिंदों कोअपने साथ ही ले जाएसिर्फ़ हमारे मासूम बच्चे रह जाएँअपना कल तो वो बना ही लेंगेकम से कम उन्हे नोंच डालने वालेजिंदा भेड़िए तो ना होंगेप्रभु अब और कोई इलाज नही बचाइस जानलेवा बीमारी काअब तुम्हे ही कुछ करना होगाआने वाले 'कल' को जीवन देना होगा

pralay ka intjar

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                                                             " तुम्हारे जन्मदिन पर "याद आता है तुम्हारे संग गुज़रा ज़मानायाद आता है तुम्हारे संग गुज़रा ज़मानातुम्हारा वो पढ़ना , मेरा वो पढ़ानामेरा पलकें उठाना, तुम्हारा पलकें झुकानायाद आता है तुम्हारे संग गुज़रा ज़मानायाद है तुमको 'प्रोजेक्ट ' का जब काम चल रहा थाआँखों में ख़ास सपना आम पल रहा थाजो मुझको बुलाकर तुमने ये पूछा था"प्रोजेक्ट देख लीजिये " तुमने ये कहा थाबहुत याद आता प्रोजेक्ट करना बतानायाद आता है तुम्हारे संग गुज़रा ज़मानायाद है तुमको ,जब तुम पढ़ाने आयी थींलगा यूँ ज़िन्दगी मेरी वापिस आयी थीसाँसें चलने लगी थीं , दिल धड़कने लगा थाप्यार का एक अंकुर फिर मन में फूटा थापर वो था प्यार सच्चा , तुमने न जानायाद आता है तुम्हारे संग गुज़रा ज़मानाकितनी कोशिशें की थीं मैंने तुमसे बात करने कीन फ़ोन , न वॉट्स ऐप ,न मेल की इजाज़त थीफिर भी आँखों से तुम्हें  मैंने पैगाम दिया था तुम्हें वो मिला था , पर तुमने स्वीकार न किया थाया फिर शायद तुमने मानकर भी न मानायाद आता है तुम्हारे संग गुज़रा ज़मानावो भी दिन कैसे भूलूँ जब तुमने ये बताया"जा रही हूँ परदेस , पासपोर्ट है बनवाया "क्या सितम मुझपे ढाया था तुमने न जानान ज़मीं का पता था , न आसमाँ का ठिकानाफिर भी रोका खुद को ,क्योंकि प्यार का सच था जानायाद आता है तुम्हारे संग गुज़रा ज़मानाचाहता था मम्मी से तुम्हें मिलानापर तुमने समझ के भी न जानामेरे पास पैसा नहीं ,गाड़ी नहीं , बॉडी नहींपर तुम्हारे लिए समर्पण और सच्चा प्यार ही सहीझूठी चीज़ों से सच्ची चीज़ों का मोल तुम्हें चुकानायाद आता है तुम्हारे संग गुज़रा ज़मानारहो तुम कहीं भी , हमेशा खुश रहनान भूलना मुझे , न मुझे याद करनापर ये ध्यान रखना सच्चा प्यार एक बारआता है जीवन में , आत्मा और मन के द्वारतुम्हारे जन्मदिन पर ये सन्देश , तुम तक पहुँचानायाद आता है तुम्हारे संग गुज़रा ज़माना                                            - mohit khare

tumhare janmdin par

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