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आंधी उम्र कि आशिकी                    दिल की  बात बडी साफ थीबनाऐ दिल जो किताबो पे                  love की spelling ना याद थीआंधी उम्र कि  आशिकी                 दिल की बात बडी साफ थी_____तेरा sandwich , मेरा वो  पराठा           बदले डिब्बो को , जैसे मिला कोई खजानातेरा वो हसंके  मुस्कुराना              मेरा ये दिल जिसका दीवाना_______2

adi umar

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खिड़की सी आती चाँद की रौशनी को ताकता शुभम ऐसे ही जाग रहा था|आधी रात उसने छत पर टहलने में निकाल दी, कुछ समय कुछ लिखने में बीता और बाकी की रात यूँ ही कटी जा रही थी| खैर रातों को यूँ जागना शुभम के लिए कोई नयी बात नहीं थी|सालों से ये सिलसिला चल रहा था,कितनी रातों को उसने अपनी आँखों के आगे यूँ ही बीतते देखा है|मगर अब समस्या कुछ बढ़ने लगी थी,लगातार जागकर बितायी रातें उसकी सेहत पर असर दाल रहीं थी|बहरहाल सोने की नाकाम कोशिश में और विचारों से जद्दोजहद में सुबह हो गयी और शुभम की जागकर बीती रातों की संख्या में एक इजाफा और हुआ|अब तो उसके दोस्त भी कहने लगे थे की किसी डॉक्टर से इस बीमारी के बारे में बात करे, अब तो ये आदत रोग बन चुकी है|और आज वो डॉक्टर बनर्जी के पास जाने भी वाला है| मगर फ़िलहाल तो वो कॉलेज जाने की जल्दी में है| अमूमन लड़कों को कॉलेज जाने की जल्दी नहीं होती, और अगर होती है तो उसका एक ही कारण है और वो जगजाहिर है| तो शुभम की जल्दी का भी ये ही कारण है, कारण का नाम है आरुही|उससे मुलाक़ात और बात करने ही कॉलेज जाते हैं ये जनाब, और इसीलिए कॉलेज के नाम पे इतने उतावले रहने लगे हैं|दोनों को मिले कोई ज्यादा समय नहीं हुआ मगर इस थोड़े ही समय में ही दोनों के बीच एक अलग सा रिश्ता बन गया है| घंटों बातें चलती रहती हैं, जब दोनों साथ में वक़्त अपनी रफ़्तार खो देता है, मौसम खुद-ब-खुद सुहाना हो जाता है, हवाएं बहने लगती हैं| ये कहिये की पूरा अस्तित्व चाहता है की दोनों ऐसे ही बैठे बातें करते रहें|शायद शुभम आरुही से प्यार करने लगा है,सुना है प्यार ही सामां रंगीन कर दिया करता है| उसकी बेताबी, वो बेचैनी किसी और कारन से भी हो सकती हैं, मगर उसकी आँखों का दिया हुआ बयान तो सच ही होगा|खैर आँखें तो आरुही की भी बहुत कुछ कहती हैं, दबी आवाज़ में ही सही| शुभम वो सब सुन लिया करता है| असल में उनकी घंटों तक चलने वाली बातों के बीच एक दो पल चुरा कर उनकी आँखें भी आपस में बातें कर ही लेती हैं|ये वो बातें जो इन दोनों को पता हैं मगर फिर भी ये इन्हें नहीं जानते|आँखों की पलभर की इस बातचीत में दोनों एक हो जाते हैं, शब्द अपनी मायने खो देते हैं और एहसासों से एहसासों की गुफ्तगू हो जाती है| ये पल भर का समय शायद दोनों को पसंद है,शायद इसी समय के एहसास के लिए दोनों एक दुसरे से मिलने को बेताब रहते हैं|बहरहाल कॉलेज में किसी फंक्शन की तैय्यारी चल रही है और जल्द ही होने वाले इस फंक्शन के लिए शुभम बेताब है| जैसे वो हर उस समय के लिए होता है जिसमे वो आरुही से मिल सके|                फंक्शन से पहले की एक और रात यूँ ही जागकर कट रही है,डॉ बनर्जी की दवाइयां भी कोई काम न कर पायी, हालाँकि उन्होंने बोला था इलाज लम्बा चलेगा, दवाइयां धीरे असर करेगी, बीमारी पकड़ने में समय लगेगा| तो एक और रात जैसे तैसे काटने के बाद अगली शाम शुभम फंक्शन में पहुचता है| आज विशेष दिन पे सभी तैयार हो कर आये हैं|आरुही भी, वैसी तो उसकी मुस्कान किसी आम दिन को भी खास बना देती है और आज तो दिन भी ख़ास है| अपनी और आती आरुही को देखकर शुभम सुध बुध खो बैठा है|हालाँकि ऐसा फिल्मों में ही होता है मगर न जाने क्यों ऐसा ही हो रहा है|फिर दोनों मिलते हैं,रोज़ की तरह बातों का सिलसिला शुरू होता है, आज शुभम का दिल कुछ ताल सा धड़क रहा है,सांसें सरगम सी लहरा रहीं हैं| आँखों ही आँखों में होनी वाली बातें जो पल दो पल को हुआ करती थीं, आज पल भर को नहीं रुक रहीं| शुभम की आँखों में प्यार साफ़ दिख रहा है, आरुही की आँखों में भी वो चमक रहा है, वातावरण हर बार की तरह उनके साथ होने पे ख़ुशी जाहिर कर रहा है| दोनों की मासुमीयत और उनके जज्बातों की सच्चाई एक ऐसा एहसास पैदा कर रही है जो शब्दों के बंधन से परे है| और प्यार भला शब्दों में कहाँ जाहिर हो पाया है|दोनों को एकदूसरे में हमेशा साथ होने की तसल्ली दिख रही है| प्यार तसल्ली ही तो है| और इसी तसल्ली को सदा के लिए अपने दिल में बसा है दोनों ने|शायद ये दोनों को सुकून देती हो|               अगले दिन सूरज की चमक आँखों में पड़ने से शुभम उठ बैठता है, आज बड़ा हल्का महसूस कर रहा है,सुबह कितने दिनों बाद अच्छी लगी है| तभी उसे होश आता है की ये रात तो सो कर गुजरी है| मुद्दतों बाद उसे नींद से जागने क एहसास हुआ है|दिल में तसल्ली से बड़ी कोई चीज़ नहीं होती|रोशनदान से आते प्रकाश को देखता वो सोचता है, डॉ बनर्जी ने बीमारी पकड़ ली या उसे इलाज मिल गया|-सम्यक

ilaaj

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तेरे सामने कभी ना आया                  बिन शतँ  के  तुझे चाया" तुझे होगा ना  कभी मालूम           इक दिल था कोई पागल !           इक दिल था कोई पागल !ऐसा नही , तुझे पाना ना थाऐसा नही , साथ रहना ना थासोचे  जो  हम , मिल जाऐ जो          जिंदगी का ऐसा  इरादा ना था" तुझे पाना ना , तुझे  कहना  ना था          फिर भी तुझे चाहना ही था_______2तेरे सामने कभी ना आया        बिन शतँ के तुझे चायातुझे होगा कभी ना मालूम      इक दिल था कोई पागल !     इक दिल था कोई पागल !

tere samne

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कुछ रह गई कमी , मुलाकात में कही                                                       क्यू लगता मुझको अब भी                                                                                         बाते पूरी हुई  ही नही                          "     "       "     "      " !होठो पे आते -आते  , akshar वो  मिट क्यू जाते    तेरी तरफ से हो पहैल , ये हम क्यू है चाहते                   ये हम क्यू है चाहते !नजर दीवानी है , तेरी महरबानी है         जुगनुओ की तरह आसूओ की कहानी है ______2कुछ रह गई कमी , मुलाकात में कहीक्यू लगता मुझको अब भी                         बाते पूरी हुई ही नही                         बाते पूरी हुई ही  नही !

kush rah bye kami

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suna tha bachpan uska, masoom khoya tha yuhimila tha jo ek dost rootha tha yuhi.khelna ussey tha khoob pasand,koi mila bhi toh bichhadney ka darr tha usko yuhi.bahut nahi maangi thi usne khushiyaa,neendo mei puri hoti thi uski duniya.roj raat soney ko usko koi na batlata,vo toh khudo roj sapno mei hi behlata.kaun samjhata ussey,vo nahi thi asli duniya,jagkar hota ussey afsosh,kyu nahi meri ye duniya.neendei karti ussey khush, isliye khoya rehta yuhi,aj jab mila ussey ek dost, paakar khoob khilkhilaya yuhi.suna tha................

suna tha

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वो कागज़ की नाव याद आती हैवो आँचल की छाँव याद आती हैवो बेफिक्री वो सुकूँ याद आता हैवो जोश-ओ-जुनूँ याद आता हैवो साइकिल पे रेस लगानावो क्रिकेट खेलने सुबह जल्दी उठ जानावो छत पे सर्दियों की धूपं में ऊंघनावो बारिश में सौंधी सी खुशबू सूंघनावो गलियाँवो यारवो पापा की डांटवो माँ का प्यारसब बड़ा याद आता हैचुरा सकता वक़्त से कुछ अगरतो यक़ीनन वो दौर चुरा लेता।।

childhood

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आदमी हूँ तो आदमी से वास्ता रखता हूँबेहयात बैगेहरत लोगो से जरा सा फासला रखता हूँ ..आदमी हूँ आदमी ..जब डग मगाने लगे कदम राह से इधर उधरहर वक्त सामने आईना रखता हूँआदमी हूँ आदमी से...बे फिजुलियत सी बात अब अच्छी नही लगतीतारिफ हो यार  सदा ऐसी जुबा साथ रखता हूँआदमी हूँ आदमी से..जो समझना चाहे वो समझे मुझेजो ना समझे वो सोच रखता हूँआदमी हूँ आदमी से...जुटी रस्मो भरी महफ़िलों से वास्ता जरा कम ही हैअच्छा हूँ तनहा हुूँ तनहाईया साथ रखता हुूँ आदमी हूँ आदमी से...

aadmi hun aadmi se

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पेरिस:पेरिस में डिजनी पार्क देखने गये। रिमझिम बारिश हो रही थी। ठंड चुभ रही थी।डिजनी आर्ट में लंदन से आये बच्चों का कार्यक्रम देखा। एक दो जगह और कार्यक्रम भी देखे। शाम को एफेल टावर देखा। वहाँ पल टावर के मोडल एक इरो में बिक रहे थे।रिक्शे भी वहाँ पर दिखे जो ई- रिक्शा रहे होंगे।पेरिस घूमाते समय जो महिला गाईड थी उसकी भाषा सुन्दर और आवाज प्रभावशाली थी। नेपोलियन बोर्नापाटा के बारे में उसने लगभग तीन-चार मिनट बोला। नेपोलियन का लोग फ्रांस में कितना सम्मान है उसकी बातों में झलक रहा था।नेपोलियन को उसकी इच्छा के अनुसार पेरिस में मृत्यु के कई साल बाद दफनाया गया।क्योंकि उसके एसेज को सेंट हेलेना द्वीप से लाया गया था और तब मान्यता थी कि समुद्र पार से एसेज आने पर छ कोफिन में एसेज को दफनाया जाता अतः इसी परंपरा का अनुसरण किया गया(गाईड के अनुसार)। फ्रांस की क्रांति, सीन नदी, वहाँ की संसद, राष्ट्रपति भवन , म्यूजियम आदि के बारे में प्रभावी ढंग से उसने बताया।पेरिस जो हमें दिखाया गया वह सुन्दर,साफ सुथरा था।अन्य भाषा बोलने पर "फ्रेंच" कहते पाये जाते हैं लोग और आगे बढ़ जाते हैं।अन्त में गाईड "नमस्ते" और "अच्छा" बोलकर विदा हुई। शायद कुछ कुछ हिन्दी वह सीख गयी थी भारत से आने वाले पर्यटकों के साथ।**यात्रापेरिस से जनेवा:पेरिस से जनेवा जाते समय मौसम सुहावना हो चुका था।यात्रा भावों के उतार चढ़ाव के साथ चल रही थी।बीच में एक जगह खाना खाने रूके।खाना खाने के बाद एक फूल के पेड़ के पास फोटो ले रहा था।तभी वहाँ से स्थानीय आदमी दुकान की ओर जा रहा था उसने मेरे हाथ से मोबाइल लिया और मेरी दो फोटो खींच कर मुस्कराते हुए मेरे धन्यवाद के साथ विदा ली।वहाँ अभी पतझड़ ही चल रहा है।हमारे यहाँ तो वसंत खिल रहा है। उत्तराखंड में फूलों का त्योहार(फूलधैयी) मना चुके हैं। शाम को लगभग चार बजे जनेवा पहुंचे।जनेवा में संयुक्त राष्ट्र संघ के अवस्थित केन्द्रों के साथ साथ जनेवा शहर देखा।उसे देख नैनीताल की याद आ गयी। झील यहाँ कृत्रिम है।फव्वारा लगभग 459 फीट ऊँचा पानी फेंकता है। पैदल चलने वाले जब सड़क पार करते हैं तो गाड़ी वाले अपनी गाड़ी रोक कर उन्हें वरीयता देते हैं, विशेष कर उन स्थानों पर जहाँ सिग्नल नहीं होते हैं केवल सड़क चिह्नित होती है।रात को एक पहाड़ी शहर लेईसिन में रूके। सामने हिमाच्छादित पहाड़ दिख रहे थे।जितना हो सका उतना मन ने समेटा।शेष छोड़ दिया।"दूर देशों से निकल करयादें लौट आती हैंजीवन बर्फ की तरह जमता- पिघलता पगडण्डियों सड़कों से निकलताइतने संघर्षों के बीचवृक्षों की तरह कटताकुछ क्षण प्यार की सांसों मेंलौट जाता है,कहानियां बनती बिगड़तीदेवासुर संग्राम सी चलती रहती हैं।"**यात्रालेयसीन(स्विट्जरलैंड) के पास माऊंट कोक्स और किंग पर कैबल कार से पहुंचे। शरीर को काटने वाली ठंड थी। जाड़ों का नैनीताल याद आ रहा dथा।थोड़ी देर बर्फ पर चलने पर सुन्दर होटल था। बर्फ पर फिसलन थी।लेकिन चलने में अच्छा लग रहा था।लगभग चालीस साल बाद बर्फ पर चलने का अवसर आया था। होटल में तापमान सामान्य लग रहा था।खाने की व्यवस्था थी साथ में शराब भी ले सकते थे। खाने की व्यवस्था में दो भारतीय लड़के थे और एक स्थानीय व्यक्ति और एक स्थानीय सुन्दर युवती।शराब पीने वाले सब लोग एक किनारे हो लिये।पीते पीते हिन्दी गानों पर नाच भी कर रहे थे। दो तीन महिलाएं भी पी रहीं थीं, अपनी टेबल पर। मैं नहीं पीने वालों में था अत: अपनी टेबल पर खाना लेकर खा रहा था।वह लड़की बहुत फुर्ती, चपलता से काम कर रही थी। वह दो बार मेरे पास आयी। पहली बार उसने कुछ बोला, मेरे समझ में नहीं आया।फिर दूसरी बार कुछ कहा मैं ठीक से सुन नहीं सुन पाया।वह फ्रेंच में बोल रही थी या फ्रेंच भाषी होने के कारण उसकी अंग्रेजी मेरी समझ में नहीं आ रही थी, पता नहीं।शायद पूछ रही हो," खाना कैसा है।" या," शराब नहीं पीना है?" जब संवाद ठीक से नहीं हो पाया वह मुस्कराते हुये ओ. के. कह कर अपने काम में जुट गयी। मैं सोच रहा था अभी शायद उसकी उम्र उच्च पढ़ाई करने की है।यहाँ काम क्यों कर रही होगी?वह इतनी सुन्दर,सरल और कर्मठ थी कि यादों में बस गयी।**यात्राग्लैशियर 3000 (स्विट्जरलैंड):ग्लैशियर 3000 (स्विट्जरलैंड) जाते समय कुछ कुछ ऐसा लगता है जैसे हम भवाली से अल्मोड़ा को जा रहे हैं या चौखुटिया(मालूशाही और राजुला की कथा के लिये जाना जाता है) से केदार को।वृक्ष फर(क्रिसमस ) के हैं।छोटी नदी जिसे वहाँ की भाषा में ब्रुक कहते हैं और कुमाऊँनी भाषा में गधेरा, शान्त होकर अपने सुर- लय में सौन्दर्य बिखेरती बही जा रही है। ग्लैशियर 3000 के आधार स्टेशन पर पहुंचने पर बर्फ पर प्रयोग होने वाले चश्मे सबको दिये जाते हैं। वहाँ से कैबल कार से पहले स्टेशन तक फिर कैबल कार बदल कर दूसरी कैबल कार लेते हैं। चारों ओर बर्फ से ढके पहाड़ देखकर शिवजी की याद आ जाती है।कितना आनंद कैलाश में लेते होंगे।कुछ का कहना है पहाड़ दूर से ही अच्छे लगते हैं, जब वहाँ रहो तो कठिन जीवन के लिये जाने जाते हैं। बहरहाल, अच्छा अनुभव हो रहा था। हिम स्केटिंग करने वाले लड़के भी दिख रहे थे।रज्जु मार्ग से पहाड़ से नीचे ले जाकर समतल स्थान पर उतारा है। बर्फ पर चलने का आनंद आ रहा है। गजब की ठंड है।मनुष्य या कहें जीवन आनंद कठिन परिस्थितियों में भी ढूंढ लेता है।बच्चे बर्फ से खेल रहे हैं। एक दूसरे पर उसे फेंक रहे हैं। बर्फ पर चलने वाली गाड़ी पर आधा घंटा घूमते हैं।टैंक की तरह वह वह चलती है,बिना तोप के।रज्जु मार्ग से ऊपर आते हैं। लगभग सौ सीढ़ियां चढ़कर एक हिलता डुलता पुल है।उसको पार कर हिमाच्छादित पर्वत शिखरों का विहंगम दृश्य का सौन्दर्य मन में लिया जाता है।वहाँ एक चीनी, फोटो लेने के लिये अनुरोध करता है, इशारों में।फिर मैंने भी उससे अनुरोध किया, इशारे में। हिन्दी गाना याद आ रहा है-"इशारों इशारों में दिल लेने वाले..।"पुल पर इतनी जोरों से हवा चल रही है कि मफलर खुल गया। कोट पंख बन गया जल्दी से फिर बटन लगाये।हीरोगिरी फड़फड़ाने लगी। बहुत से लोग पुल के किनारे से ही लौट गये क्योंकि तेज हवा में पुल हिल रहा था और ठंड काट खा रही थी।हमसे दस दिन पहले जो समूह आया था उसे यहाँ जाने की अनुमति नहीं मिली थी, खराब मौसम के कारण। ऊपर ही अच्छा खासा होटल था, वहाँ तापमान सामान्य रखा हुआ था। खाने में देरी थी अतः सोचा चाय पी ली जाय। पूछा तो कीमत है साढ़े तीन यूरो मतलब 250 रुपये।कार्ड है, पैसे हाथ से नहीं देने हैं अतः पी ली। स्वाद चाय का बेहद अच्छा है।वैसे है, लिपटन चाय ही।खाना खाकर कैबल कार से उतरे और होटल की ओर यात्रा बढ़े जा रही है।बैठे बैठे गत वर्ष एक महिला से सुने शब्द याद आ रहे हैं," सज(आराम) तो अपने घर में ही आती है।"लिचटेंसटिन(देश):वाडुज में हूँ जो यूरोप के एक छोटे देश लिचटेंसटिन की राजधानी है। एल्प्स से घिरा है। देश का कुल क्षेत्रफल लगभग 17.5 वर्ग किलोमीटर है, जनसंख्या चालीस हजार।राजकुमार का महल ऊँचाई पर है।नीचे से उसका एक भाग दिख रहा है। वहाँ जाने की अनुमति नहीं है। दुकान में चोकलेट खरीद रहा हूँ। एक लड़की काउंटर पर है, मुझे बता रही है," इसके साथ ये, ये मुफ्त है।" इतने में एक व्यक्ति(शायद दुकान का मालिक है) मेरे बगल से दुकान में यह कहते प्रवेश करता है कि ," यह लड़की तुमसे प्यार करती है,यंग मैन।" मैं मंद मंद मुस्कराया और वह लड़की भी।अच्छा लगा सबको बताने में।*** यात्राइंटरलेकन:इंटरलेकन(स्विट्जरलैंड) में यशराज चोपड़ा की मूर्ति लगी है।उन्होंने अपनी बहुत सी फिल्मों की शूटिंग यहाँ की थी अत: उनके सम्मान में यह मूर्ति स्थानीय प्रशासन ने लगायी है।उसके सामने कैसीनो है।घड़ियों की बहुत सी दुकानें थीं।कोई-कोई घड़ी छ,सात लाख रुपये की थी। पेड वास रूम का प्रयोग एक इरो में कर सकते हैं अर्थात 72 रुपये।स्विट्जरलैंड में घूमते समय लगता है जैसे कुछ कुछ उत्तराखंड, हिमाचल आदि पहाड़ी राज्यों में हैं। लेकिन यहाँ सड़कों पर बहुत अधिक सुरंगें हैं, मजबूत पहाड़ों के कारण।लूसर्न(स्विट्जरलैंड) में छोटे पहाड़ पर मूर्तिकार ने रोते शेर की मूर्ति बनायी है।गाइड के अनुसार फ्रांस की क्रांति के समय यहाँ के सुरक्षा कर्मियों (स्विस गार्डस) के कत्लेआम को इंगित करती यह मूर्ति है।मार्क ट्वैन ने इस सजीव चित्रण को दुनिया का सबसे मार्मिक चित्रण कहा है।कुछ दूरी पर एक आदमी और एक महिला बाइबिल बांट रहे थे।पीने के लिये काफी भी रखे हुये थे।**यात्राइन्नसब्रुक:आस्ट्रिया के शहर इन्नसब्रुक में हूँ। शहर में अच्छी साफ सफाई है।कहीं प्लास्टिक, कागज आदि नहीं दिखते हैं।पुराने समय की सुन्दर इमारतें हैं। एक गली से गुजर रहा हूँ।शाम के आठ बजे हैं।आगे गली में दो हट्टे कट्टे भीखारी स्लीपिंग किट में घुसे हैं। एक नींद में है और दूसरा जगा है और किसी राहगीर को ईशारे कर बुला रहा है।राहगीर उसकी उपेक्षा कर चलता रहता है। थोड़ा आगे बढ़ता हूँ एक युवक और एक युवती खड़े खड़े एक दूसरे को चूम रहे हैं जैसे दो कबूतर आपस में चोंच लड़ाते हैं।उन्हें. देखने की जिज्ञासा किसी को नहीं है।भीड़ अच्छी खासी है।आगे एक बिल्डिंग है, गाइड के अनुसार किसी राजा ने रानी को शादी की शालगिरह पर भेंट की थी, गोल्ड प्लेटेड है।**यात्रावाटन्स:वाटन्स( आस्ट्रिया) में स्वोरस्की क्रिस्टलस देखने गये। गाइड के अनुसार स्वोरस्की क्रिस्टलस ने इस शहर के बहुत से लोगों को रोजगार दिया है।कुछ सामान भी वहाँ खरीदा। वहाँ से खरीदे सामान/आभूषण पर कस्टम ड्यूटी की छूट है जो हवाई अड्डे पर वापिस होती है। कस्टम का नाम सुनते ही मेरे दोस्त ने कहा," नहीं खरीदना है।कस्टम के चक्कर में नहीं पड़ना है।" मैंने खरीदने पर जोर दिया और हमें एक फार्म भर कर दिया और पासपोर्ट का नम्बर भी उसमें दर्ज कर दिया।एयरपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी वापिस मिल गयी।भारत में जब स्वोरस्की के बारे में बताने लगा तो वे बोले, "हम स्वोरस्की के बारे में जानते हैं। हमारे दोस्त की शादी में उसके आभूषण प्रयोग हुये थे।" यूरोप में कहीं भी हार्न गाड़ी वाले नहीं बजाते हैं, जबकि हम लोग भारत में जरूरत न होने पर भी हार्न बजाते हैं।अमेरिका में भी यही अनुशासन मिलता है।गुलामी के बहुत से अवगुण तो हमने लिये पर उनकी अच्छी बातों को छोड़ दिया।अन्तर्राष्ट्रीय उड़ानों में, सुरक्षा जाँच मेरी नहीं होती है पता नहीं क्यों? घरेलू उड़ानों में होती है।1999 में अमेरिका जाते समय भी ऐसा ही हुआ था।मुझे उस खान की याद आ गयी जिसे दो घंटे एअरपोर्ट पर सुरक्षा कारणों से बैठा दिया था।आगे-"तब समय इतना भोला थाभोले बाबा जैसा था,इधर पलटताउधर पलटता,तपा हुआ थापर तप भी था।"**यात्राम्मूनिख:म्मूनिख में ओलम्पिक स्टेडियम, कार कम्पनी का आफिस, शहर की चहल पहल।संगीत के साथ लोगों का खाना पीना।म्यूनिख (जर्मनी) उड़ान रद्द हो गयी है। हवाई जहाज पर सामान चढ़ चुका था। जहाज में तकनीकी खराबी आ गयी थी,उसे ठीक करने की कोशिश की गयी। यह सब होते होते रात के साढ़े ग्यारह बज गये।तब उद् घोषणा हुई कि उड़ान रद्द की जाती है। सब यात्री अपना सामना वापिस ले लें।जिस कंपनी का जहाज था उसके कर्मचारी आवश्यक कार्यवाही में जुट गये।काउंटर पर बहुत से लोग जमा हो गये।दूसरी एअर लाइंस से टिकट बुक करने की प्रक्रिया शुरु हुई। कुछ ग्रुप में सब लोग विदेशी भाषा नहीं जानते थे।मैंने बंगाल के एक समूह को उनसे हिन्दी में बात करते पाया।वे उन्हें समझाते जा रहे थे और एअर लाइंस वाले भौंचके उन्हें देख रहे थे।फिर बीच का रास्ता निकाला गया।लेकिन बीच के लोग अपनी बुकिंग पहले कर रहे थे। फिर होटल बुकिंग का नम्बर आया।उसमें भी यही सब हुआ। आखिर रात ढ़ाई बजे हमें होटल मिला। हिन्दी ने गति पकड़ी हुई है यह जान कर खुशी हुई। लुफ्तहंसा में उद् घोषणाएं जर्मन और हिन्दी में होती हैं(भारत-जर्मनी की उड़ानों में)। और हिन्दी फिल्में भी देखने को मिल जाती हैं।नमस्ते कहने वाले तो बहुत लोग मिलते हैं।कुछ सफेद बालों और भारतीय होने के कारण।हाँ, लेकिन महिलायें नमस्ते कहते नहीं मिलीं।

yatra yatra yayra

travelogue 0

ae zindagi tera kya ab karu,tere diye jakhmo se kya ab kahu.bahut paresan rehta hu,kuch bhi aacha na ab sochta hu.hai tanhaiyaa charo taraf,roj kuch naya bhogta hu.makaan toh mile,par ghar na mila,dost toh mile, par humdard na mila.ek adhuri kahani roj likhta hu.meri umra mei ye kaha hota hai,dard ka samundar kaha khatm hota hai.hai wahi purana marz, jo taklif deta hai.kaise kahu mai roj kitna  rota hu,hai toh koi dawa de,apne sare gum wapas lemai roj roj yaha bhatakta hu,khatm kar ye natak apna,maut ki ab saja tujse maangta huae zindagi......................

ae zindagi

poems 1

होश होता मुझको अगर                         कैसे जिता इतनी उम्र " तेरे प्यार का ही असर                मरके भी मै , जिन्दा हूं अब______ 2होश होता मुझको अगर                    कैसे जिता इतनी उम्र_____ 2"आखो को जब भी बहम होता          तू साथ ना ये जिक् होता____2कर लेते बंद , आंखे हम अपनीदिल के कोने मे , तू साथ होता !   "     "    "    "  ,    "      "      "  !            तू साथ होता !होश होता मुझको अगर                कैसे जिता इतनी उम्र !

hosh hota

lyrics 1

शायद मुझसे खफा है कोई---© एक हसरत अधूरी रह गई,शायद कोई कमी रह गईं |बैठा था किसी के इंतजार में,वों इंतजार बाकी रह  गयी ||इस बात से अनजान है, कोई-------शायद मुझसे खफा है कोई---------© यादों के सैय्या पर,अपनी सर झुका रख्खा हूँ,तेरी चंचल अदाओं की तस्वीर बना रख्खा हूँ |आ जीने का सहारा दे मुझे –बीते कल का इतिहास बना रख्खा हूँ ||आज फिर ख्वाबों की गलिओं से गुजरा है कोई------शायद मुझसे खफा है कोई------© दिल में बहते भावनाओं की प्रवाह हो तुम,नब्ज से गुजरते रक्त की पहचान हो तुम,फिजां में फैली खुशबू की तरह,एक खुशनुमा एहसास हो तुम ||दिल के दरवाजें पर दस्तक दिया है कोई------शायद मुझसे खफा है कोई-------------------[ by shivam kumar singh ]-------------

shayad mujhse k..

poems 0

chehra uska dekhkar mai ruk sa gaya,ek pal ko khudko bhool sa gaya.bahut dard tha uski jubaa pe.nazrein uski koi sahara maang rahi ho jaise,dil kahi khoya tha uska vaise,mai sochta raha kya kahoo usseybahut dard................fariyaad kare bhi koi toh aakhir kissey,zindagi jab roothi ho khudse.bahut dard............duniya mei aisi mehfil hoti hi kyu hai,jab marna hi hai,toh jeena kyu hai.koi itna gumgeen kyu hai,sawaal itne hai ,toh jawab miley kaise,zindagi jab roothi ho khudse.bahut dard.......................

bahut dard tha

lyrics 1

आज कोशिश की थी मैंने जिंदगी नामक एक किताब पढ़ने की, सारे पन्नों पर हसीन लम्हों के साथ साथ कुछ अनकहे अल्फाज़ो के भी दस्तखत थे।

life

poems sher-o-shayari 0

कोई बात है जरूरी , लवजो की है दूरी          देखे तुझे इस तरहा , खुद के लिए जरूरी_____ 2कोई  किताब ! बिन पन्नो के कोई  जबाव  ! बिन लवजो के         चली आओ ___ इतनी  करीब          भूलू खुद को ____ मै गरीब            ".     ".    ". ____  ".    "मौका मिला हो , सदियो का आज        कहनी है तुझसे ,  दिल की जो बात_____2लवज जो भूले , तेरे रास्ते         थाम लेना उनको , अपना जानके !           ".     ".        ".          ".        ".      !कोई बात है जरूरी , लवजो की है दूरी     देखे तुझे इस तरहा , खुद के लिए जरूरी             खुद के लिए जरूरी !

zaroori

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i set off at dawn, sped to every path that came around, ignored the dusk on my way, waited till i overcame my yawn, alas! still dreaming didn't realize one precious moment has just gone."live in the moment" is what i lived by, forgot that other aspects might also need a try, someday i will realize life is not to look at past and cry.moved little further to assess my illusive empire and stood by a mirror to see that crown, heard someone laughing; yet to figure out yourself but you did set off at dawn.

set off at dawn

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koi toh jariya mile tere paas aane ka,bahut thaka hoo ,duniya ki race mei,bahut gira hoo,apni hi nazron mei,ab koi toh nazariya  miley ,tere paas aane ka.khauf mei jeeta hoo,roj thoda thoda peeta hu,ye gum k jaam,,,ab kuch nahi toh fursat mei rota hoo. neendei ruswa hai,chain lapata haihar ek subah mujhse hi khafa hai.mausam badalte hai par unke mijaj nahi,zindagi ab kyu badalti nahi.koi toh................mai sunsaan sadak par chalta nahi,bheed mujhe pasand karti nahi.diwaron ki kaid itni achhi bhi nahi,par kya karu,iske siva koi manzil nahi.rihayi hogi par afsosh mujhe pata na hoga,wo ehsas ki baarish ka aashiya kaha hoga.koi toh jariya........................

koi toh jariya mile

lyrics 1

boy--तेरे ही मुताबिक हम ढल गए                 कहती हो मुझे तुम , क्यू बदल गए______2बस इतना जान लीजिए                    इश्क मे ये ना कीजिएकोई दर्द आेर हो तो                   शौक से मुझे दीजिएबस इतना जान लीजिए ! बस इतना जान लीजिए !girl---रूक-रूक फासलो को , तय करना है जिनकी अदत               डरता है वो दिल हमेशा , छुट जाऐ ना वो मुसाफिर                               छुट जाऐ ना वो मुसाफिर !boy --खुद से बढके मैने चाहा है तुझे                   ये बात अलग कभी कहा ना तुझे____2इश्क की जो बात है , खामोश हर इक सांस है        लवज हो चाहे अधूरे                            रब की ये सौगात है !                            ".   ".   ".     ".      " !तेरे ही मुताबिक हम ढल गए          कहती हो मुझे तुम , क्यू बदल गए ,बस इतना जान लीजिए            इश्क मे ये ना कीजिए ,कोई दर्द ओर हो तो                   शौक से मुझे दीजिए ,बस इतना जान लीजिए !बस इतना जान लीजिए !

tere he mutabic

lyrics 1

तू इन्सान बना हेवान ! तू इन्सान बना हेवानमै इन्सान बना हेवान ! मै इन्सान बना हेवानमां की लोरी से प्यारी, पैसे की झन्कार     तू इन्सान बना हेवान ! मै इन्सान बना हेवान कहा गई तेरी वो महोब्बत          कहा गया तेरा वो इमानजिसके लिए लडने को , तू रहता था तैयार !तू इन्सान बना हेवान ! मै इन्सान बना हेवान !

tu insaan

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