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प्रलय का इंतजार

क्यों इंसान हैवान बनता जा रहा है
संत कहते हैं ये कलयुग की निशानी है
इतिहास कहता है ये रीत पुरानी है
इसी दिन का हमें इंतजार था क्या
ये 'आज' इतना डरावना है तो, ज़रा सोचो
हमारा कल कितना भयानक होगा
जिनके सपनों मे परियों की जगह
आज शैतानों ने बस्ती बना ली है
क्या वो नन्हे फरिश्ते हमारे
अपना कल चैन से जी पाएँगे
जिन बच्चों को शैतान आज रौंद रहे हैं
वो अपने भविष्य को क्या देकर जाएँगे
कदापि नही! उनके मन मे तो
रोज नये बवंडर उठते होंगे
जिसकी हम कल्पना भी नही कर सकते
रात दिन दिल से आँसू निकलते होंगे
और हमे नज़र भी ना वो आते होंगे
नज़र भी कैसे आएँ उनके आँसू
हमने आँखों पर पट्टी जो बाँधी है
काश धरती पर फिर से प्रलय आ जाए
और सभी काले मन वाले दरिंदों को
अपने साथ ही ले जाए
सिर्फ़ हमारे मासूम बच्चे रह जाएँ
अपना कल तो वो बना ही लेंगे
कम से कम उन्हे नोंच डालने वाले
जिंदा भेड़िए तो ना होंगे
प्रभु अब और कोई इलाज नही बचा
इस जानलेवा बीमारी का
अब तुम्हे ही कुछ करना होगा
आने वाले 'कल' को जीवन देना होगा

PRABHI SE KI GAI EK VINTI

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Writing by

GEETA BHARDWAJ

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