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writingkhilauna

खिलौना

शक नही ये तो इष्क नही
जानृवर तू सिरफ खिलौना है..।

पहले तो ब्राह्मण खाया
फिर इनद्रण खाया
वेद मनु सब ने पूरा खाया
आखिर मोलला जो बाकी खाया
बस् तैय किया ये पैगंबर ने..।

बात ये तो नही समझो प्यारो
बंदन करें शोर मचाने से गरीब को
बच्चे भूखे मरते अन्पठ नालायक हो
किसान जो है खेती नही, पैसा नही..।

नौजवान को और कोई काम नही,फिर
बोलो गाय बचाओ, खोलो लपडे मारो
गांधी ने डर के बोला..
जो भूखे है उस के आगे
हरि बोलना सोचो दो बार..।

ये है दौलतवाला और कुरसीवाला
दोनों का ही खेल है समझो..।

                      पि.ए.ए. लत्तीफ्

Its a poem based on social issues

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Writing by

Abdul latiff P A

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