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tumbhi microsites

writingZindagi ek karz hai

आहिस्ता चल ज़िन्दगी
कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है

कुछ दर्द मिटाना बाकी है
कुछ फर्ज़ निभाना बाकी है

रफ़्तार मे तेरे चलने से
कुछ रूठ गए कुछ छुट गए

रूठो को मनाना बाकी है
रोतो को हँसाना बाकी है

कुछ हसरते अभी अधूरी है
कुछ काम अभी और ज़रूरी है

ख्वाईशें जो घुट गयी है दिल मे
उनको दफनाना बाकी है

कुछ रिश्ते बन कर टूट गए
कुछ जुड़ते जुड़ते छुट गए

उन टूटे छूटे रिश्तों के
ज़ख्मो को मिटाना बाकी है

तू आगे चल, मै आती हूँ
क्या छोड़ तुझे ज़ी पाऊँगी ?

इन साँसों पे हक़ है जिनका
उनको समझाना बाकी है

आहिस्ता चल ज़िन्दगी
कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है

Slow down our life as we have to go long way

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Writing by

shaji rajeev

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