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writingUsi pe main marta hoon

तारीफ़ तेरे होठों से ज्यादा ,
तेरे लबों की मैं करता हूँ ,
जो सुर्ख गुलाबी रँगत लिए ,
उसी पे मैं मरता हूँ ।


यूँ तो होठों और लबों में ,
अंतर नहीं कोई भी ,
पर जिनको छूने से रस टपके ,
उसी पे मैं मरता हूँ ।


होठों के खुलने पे ,
लबों के खिलने पे ,
जो जश्न ~ ए ~ बहार आती है ,
उसी पे मैं मरता हूँ ।


होठों और लबों का तो ,
एक बहाना है जाने जाना ,
तेरे जिस्म में एक हरकत हो ,
उसी पे मैं मरता हूँ ।।

This Hindi poem highlights the feel of a Lover in which He admit His wish in front of his beloved.

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Writing by

Praveen Gola

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