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जब मन नहीं करता है कुछ करने का, तो लिखता हूँ मैं
जब मन करता है मन को छूने का, तो लिखता हूँ मैं।

ज़िंदगी से लड़ते-लड़ते, ज़िंदगी गुज़र जाती है
जब मन करता है कभी जीने का, तो लिखता हूँ मैं।

कोशिश करता हूँ लफ़्ज़ों से,
जज़्बात जता सकूँ, जज़्बात छुपा सकूँ
जब मन करता है तुझे याद करने का, तो लिखता हूँ मैं।

बिन बादल बरसात,
देखी है कभी, सुनी है कभी
जब मन करता है कभी भीगने का, तो लिखता हूँ मैं।

मन की गहराई,
जितनी गहरी है, उतनी सुनहरी है
जब मन करता है इसमें उतरने का, तो लिखता हूँ मैं।

आसमान में उड़ने की ख़्वाहिश,
हर परिंदे की बस यही ख़्वाहिश
जब मन करता है कभी उड़ने का, तो लिखता हूँ मैं।

हँसते हुये कैसे रोया जाये,
सोचा है कभी, किया है कभी
जब मन करता है ऐसा करने का, तो लिखता हूँ मैं।।

#RockShayar

Being writer is a condition...not profession..

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Writing by

RockShayar

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