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writingTeri Yaad Dilaati Hai

जब भोर अपने आँचल से
प्रभा छलकाती है
काया की हर इन्द्रिय
पुलकित हो जाती है
मेरे आनंद के आँगन में
बस एक कमी रह जाती है
सर्द पवन तब दिल में
इक सिहरन उठाती है ... तेरी याद दिलाती है|

तू जब आती है
बहारों की भीनी खुशबू
चन्दन बिखराती है
और सांझ ढले कोई कोयल
जब कूक उठाती है ... तेरी याद दिलाती है|

निशा की श्यामलता जब
चांदनी में नहाती है
कोई कविता तब दिल से 
मेरे होठों तक आती है
और अधसोई मेरी आँखों में
चेहरा तेरा दिखाती है ... तेरी याद दिलाती है ||

How my love teases me!

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Writing by

Vikas Pratap Singh

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