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writingTaareef Azeez ki

तारीफ़ अज़ीज़ की

मेरा अज़ीज़1 घर से होकर इतना नायाब2 निकलता है,
जिस तरह सुबह-2 फ़लक3 से आफ़ताब4 निकलता है।

मंज़र5 ना पूछिए वो चेहरे से घनी ज़ुल्फ़ों को हटाने का,
जैसे अन्धेरी रात में आहिस्ता-२ माहताब6 निकलता है।

हल्का सा मुस्कुराने पर भी गालों का सुरख7 हो जाना,
मानो ओस की सबनम8 से खिला कोई गुलाब निकलता है।

माशा-अल्लाह9, उनकी बातों की मिठास का ज़ाइका10,
यूं लगता कि आबशार11 से मिठ्ठा-२ आब निकलता है।

सुभान-अल्लाह12, ईक जादू सा है उनकी कोशिशों में भी,
उनका किया हर जत्न13 अक्सर जो कामयाब निकलता है|

उनके लिबाज़ों14 की सादगी, वो ताज़गी, वो नाराज़गी,
उनकी हर अदा पर अशीश दिल से आदाब15 निकलता है।

1.beloved 2.rare 3.sky 4.sun 5.view 6.moon
7.red 8.dews 9.appreciation 10.taste 11.waterfall
12.praising God 13.effort 14.dresses 15.salutation

praise of beloved

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Writing by

Ashish Aggarwal

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