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writingShamma aur parwana

शम्मां 


शाम  डली  और  तारे  निकले
शम्मां   अभी  तक  क्यों  न  जली
तड़प  रहा  है  परवाना 
जलने  को  ..................
वक्त  भी  है  वही
है  जगह  भी  वही
शम्मां   रोशन  कल  हुई  थी  यहीं
इन्तेहा  हो  गयी  है
अब  तो  इन्तजार  की
सुलग  रहा  है  परवाना 
जलने  को   ..................
दुनिया  वालों  की  नजरें  अच्छी  नहीं
सच्ची  मोहब्बत  के  दुश्मन  कई
ये  कैसी  ज़माने  की  आंधी  चली
शम्मां  फिर  ना  जली
शम्मां  फिर  ना  जली
परवाने  को  है  फिर  यकीं
फिर  होगा  मिलन  इक  दिन  यहीं
मर  मर  के  जी  रहा  है  परवाना
बस  इसी  इंतजार  में
बस  इसी  इंतजार  में
शाम  डली  और  तारे  निकले   ----------
                
                                 ( किशोर  )

Love poetry

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Writing by

Kishore

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