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writingSardar VallabhBhai Patel

 

छोटे छोटे सवालो के जवाब 

भी हम ना ढूंढ पाये

अब तुम्ही बताओ 

पटेल जैसा नेता 

हम कहाँ से लाये 

 

कितनी ही रियासतों को 

पल मैं एक कर दिया 

(सरदार) नाम मैं उनके पहले से था 

सरदार बन कर दिखा दिया 

 

झुकना होता है क्या 

वो जानते नहीं थे 

नाजायज़ मांगे किसी की भी 

वो मानते नहीं थे 

 

मानव तो थे वो हार्ड मॉस के 

लोह पुरुष बन कर दिखा दिया 

राज़ और नीति के मायने है क्या 

यह दुनिया को दिखा दिया 

 

काश: आज वो हमारे बीच में होते 

चोराहे पे हम खड़े आज यूँ ना रोते

बेठे है सिंहासनो पर जो आज  

उनको नहीं आती कुछ भी लाज 

 

गुजरात नाम ऐसे ही नहीं मिला

       (गुजरात को)

कुछ भी कर गुजरते है जो 

वो ही गुजरात की माटी में मिला करते है 

दोस्तों इसी माटी में मोदी जैसे कमल खिलते है 

This poem dedicated to Mr.Sardar Vallabhbhai Patel

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Writing by

hari krishan

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