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रुत
भंवरों के कलियों पे, मचलने की
शम्मा पे परवाने के, जलने की
शिकवा न कोई शिकायत करने की 
रुत आयी है , रुत आयी है, रुत आयी है
फिssर रुत आयी है.. …………………………………………….
बहारों ने फिजां में खुशबू, घोली है, घोली है
पपीहे ने पीहू की बोली, फिर बोली,  बोली है
काली घटाओं के उमड़ने की
बिजलियाँ गिरने गिराने की 
और झूम के बादल बरसने की
रुत आयी है, रुत आयी है, रुत आयी है
फिssर रुत आयी है....……………………………………………
कमसिन रुखों पे, लाज की लाssली है
मुस्कान लभों की, पायल की झंकार वाली है
गिन गिन के कदम रखने की
बल खाती कमरिया ना सँभलने की
रुत आयी है , रुत आयी है, रुत आयी है
फिssर रुत आयी है..………………………………
 

This poem reflects the real love, affection in natural way contains classic words of poetry which are used in old movies.

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Writing by

Kishore

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