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writingPrem ptra

प्रेम पत्र प्रेषित किया
पता लिखना भूल गया तो
डाक विभाग ने उसे लौटा दिया,
बहुमूल्य समझ कर।
उस पत्र में लिखा था-
प्रिय,सपना जो मल्लीताल में देखा था
तल्लीताल आने तक टूट गया था,
क्योंकि वह मछली की तरह तैर नहीं पाया
हवा की तरह बह नहीं पाया
बादल की भाँति उड़ नहीं पाया
पानी की तरह उछल नहीं पाया।
पत्र को फिर चिपकाया
बार-बार पता जाँचा
फिर उसे भेजा,
इस बार चूहे ने
उसे कुतर दिया।
चूहे को पता नहीं था
कि प्रेम क्या होता है
कुतरना उसका स्वभाव था
अतः उसने कुतर दिया।
बर्षों बाद लगा
जो पक्षियों की तरह उड़ रहा है
वृक्षों में हर भरा है
आकाश में टिमटिमा रहा है
किसी मुस्कान में बुदबुदा रहा है
विद्यालयों में पढ़-लिख रहा है
रास्तों में आ-जा रहा है
झील के किनारे उठ-बैठ रहा है
पहाड़ियों को लांघ रहा है
जवान और किसान बन रहा है
मुझे धीरे-धीरे छू रहा है
मेरा ही प्यार है।
**महेश रौतेला

बर्षों बाद लगा जो पक्षियों की तरह उड़ रहा है वृक्षों में हर भरा है आकाश में टिमटिमा रहा है किसी मुस्कान में बुदबुदा रहा है विद्यालयों में पढ़-लिख रहा है रास्तों में आ-जा रहा है झील के किनारे उठ-बैठ रहा है पहाड़ियों को लांघ रहा है, मेरा ही प्यार है।

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MaheshRautela

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