Follow Us
  • SIGN UP
  • tumbhi microsites
tumbhi microsites

writingMain Kaun Hoon

जाने कहाँ खो गयी है वो लड़की
नटखट अल्हड़ और थोड़ी नकचढ़ी सी
बेटी और बहन के रिश्तों में बंटकर भी
उसका  वजूद अब भी कहीं बाकी था
फिर क्यों पत्नी और बहू बनते ही
जैसे सब पल में बदल गया
जो थोड़ा "अपना "बचा था वो -
माँ बनने के एहसास तले दब गया
आज ये सारे रिश्ते मेरे हैं
बस मैं ही खुद की ना रही
इन रिश्तों की भीड़ में
कोई तो मुझे खुद से मिला दे
जीती जा रही हूँ किसी कशमकश में
कोई तो मुझे खुद के लिए जीना सीखा दे ..... 

This poem is about the emotions of almost every women which generally they are unable to express...

Report Abuse

Please login to report abuse.
Click on the Report Abuse button if you find this item offensive or humiliating. The item will be deleted/blocked once approved by the admin.

Writing by

Sarika Mishra

Likes

0

Views

166

Comments

1

View More from me

You May Also Like

GO