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writingKhud se mulakaat

खुद से मुलाक़ात”

आईने में देख खुद को कुछ ऐसा लगा
जैसे खुद से कुछ कहना है मुझे।
जाने कहाँ छोड़ आई हूँ खुद को
तनहा सी हो गयी हूँ खुद के बिना।
थकन हो गयी है इस ज़िन्दगी के कारोबार से
अब बैठ के खुद को सुनना है मुझे।
लिपट के रोना है सर रख गोद में सोना है
बिन बोले सब कुछ समझना है मुझे।
तड़पन सी लगी है खुद से मिलने की
ज़िक्रे-मोहब्बत अब खुद से करना है मुझे ।

“मीनाक्षी”

Poem about love and self realisation.

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