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writingKhane ki keemat tum kya jano

कहते हैं एक (अभि)नेता कि खाना मिलता है बारह रुपय्ये में /
दूजा नेता कहे पाँच  में तो तीसरा कहे सिर्फ़ एक रुपय्ये में //

सिर्फ़ एक रुपय्ये में अगर भूख मिटती तो सबका ही पेट भरता /
मुफ़्त में मिले सरकारी मिलावटी भोजन से कोई मासूम ना मरता //

कहे सुभाष तुकबाज़ क्यों सत्ता के गरूर में नेता हैं बहकते /
नही कम कर सकते महँगाई पर कुछ सोच समझके तो कहते //
 

Irresponsible utterences of leaders

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Writing by

SUBHASH AGASHE

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