Follow Us
  • SIGN UP
  • tumbhi microsites
tumbhi microsites

writingKhamosh Dil

खामोश......, ये दील कहता कुछ,
बंद आँखे भी..... देखती हे कुछ ।।

पर.... ना पता हे उसका,
ना उसके दि-दार का।।

दिल धडकता हे कुछ,
आँखे बयाँ करती हे कुछ ।।

ना सागर की घहराई ने, समझा कुछ,
ना आसमा की दुरीयोँ.. ने कुछ।।

हम तो नाव लेके निकले थे उसे ढूँडने,
मारे फिरते समँदर मे कुछ, गलीयोँ मे कुछ।।

ना तो हम खुदा से कहेँगे कुछ,
ना आपने आपसे कुछ।।

हम तो मोहब्बत के मारे हे तेरे,
तुम ही हो अब हमारे सब कुछ।।

Jubani mere dil ki .... khamosh dil

Report Abuse

Please login to report abuse.
Click on the Report Abuse button if you find this item offensive or humiliating. The item will be deleted/blocked once approved by the admin.

Writing by

vijaykumarkagne

Likes

0

Views

1

Comments

0

View More from me

You May Also Like

GO