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writingKaanoon

कानून

सामी ने ऐसा बोला ः
जरूरी नही कि
सब को पसंद आए
बस,सिनदगी ऐसे जिओ
कि रब को पसंद आए

तो मैं ने कहा ः
मगर जिनदगी कभी ऐसा नही यार
मत भूलिए इनसान को यार..

नही मानती सामिजी ः
हर इनसान की खुषी
कोई पूरा नही कर सकता
ये तो दुनिया कि कानून है..

सुनके मैने। ऐसा पूछाः
जो आप कहते वो इनसान को छोडो..
जो कपडा नही, बसती नही
वो इनसान को बोलो भाई..।

सवामी ने फिर कुछ बोला नही
जरा सोच के..
मै भी छूप के रहा
सोच लो फिर मै कया करूम..।

                       पि.ए.ए. लततीफु

Its a poem that tells to change our laws which is against the poor and almost humanity.

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Writing by

Abdul latiff P A

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