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writingJInda hu mein

जिन्दा हु मै हर इक सांस भारी है

साँस लेने की कोशिशे बदस्तूर जारी है 

जाने कब तलक चलेगा कारोबार सांसों का सट्टा बाज़ार में बोली जारी है

जो मौत जीती तो में हारा, जो जिंदगी तो में ही हारा

अजीब सा एक खेल जारी है

कल फिर सहर होगी इस शब के बाद, कल भी तो ऐसा ही हुआ था

शब सहर , सहर शब दुनियादारी है

आना जाना जाना आना जारी है

आज वोह सो ही गया, पिछली चोदह रातों से जागा था मै जीसके साथ

चाँद को नींद आ ही गयी

नींद को मेरी आँखों से कोई गिला भारी है 

रोज़ रोज़ एहसान जताना अच्छी बात नहीं 

मगर ये सच है, जिंदगी मेरी तुजसे वफादारी है 

कैसे भी हो जीये जाना जारी है

जिन्दा हु मै , जिन्दा हु मै, जिन्दा हु मै

 

kabhi kabhi jinda rahna majburi ho jati hai mout se bhi badtar jindgi jina padta hai

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