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writingFarhana Poetry

मुख़्तसर सी बात

मुख़्तसर सी बात इस आदाब से की जाए,
कहने को हों लफ्ज़ पर जज़्बात से की जाए...

अपने आप से मुलाक़ात एक बार की जाए,
बुझे हुए उन कोनो पर फिर रौशन चराग की जाए...

भीड़ में फिर अपनी ही तलाश की जाए,
खो जाने से बेहतर है नई शुरुआत की जाए...

हौसलों की मरम्मत फिर एक बार की जाए,
टूटी हुई कश्ती से ही दरिया पार की जाए...

मुख़्तसर सी बात इस आदाब से की जाए,
कहने को हों लफ्ज़ पर जज़्बात से की जाए...

-फरहाना फ़िरदौस

Farhana poetry, mukhtasar si baat, inspirational poem.

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