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धड़कन 

बहुतों ने कहाँ बहुतों से सुना 

पर दिल ने नहीं माना

एक तिरछी नज़र का तीर लगा तो 

दिल की धड़कन को जाना 

बहुतों नें ..................

गुलशन में बहारें आने लगी

और खुशबू फिजां में घुलने लगी 

पर दिल था मेरा नादाँ 

एक फूल निगाहों को भी जब भाने लगा 

तो भंवरों की तडपन को जाना 

बहुतों नें ..................

फिर नींद आखों से उड़ने लगी 

और चैन दिनों का खोने लगा 

पर दिल था मेरा नादाँ 

एक चेहरा निगाहों में मुस्काने लगा 

तो राजे-मोहबत को जाना 

बहुतों नें ..................

 

Kishore

 

 

 

 

 

 

Dil ki dhadkan

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Writing by

Kishore

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