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writingEk Zindagi

सड़क पर दौड़ती एक ज़िंदगी .. मौत के थी कितनी करीब ,
पंखों की लाचारी से ... उड़ पाना नहीं था उसका नसीब ।

बेरहम गाड़ियों के बीच से  ....... वो गुज़र रहा था अनजाने में ,
मगर दो दयावान आँखों ने  ....... पहचान लिया था उसे वीराने में ,
हर पल लगता था जैसे  …… कि वो कट जाएगा ,
उन गाड़ियों के नीचे आ  ....... वो मर जाएगा ।

और पंछी की भला यहाँ क्या औकात ?
यहाँ तो इंसान भी गर कुचल जाएँ  …… तो ना होता किसी को आभास ,
एक और ज़िंदगी  ....... चली उसे बचाने ,
अपनी बेशकीमती ज़िंदगी को थी  …… दाँव पर लगाने ।

किनारे पर खड़ी उसकी अर्धांगिनी  ....... रही थी पुकार ,
कि मत जाओ उसे बचाने  …… कहीं उजड़ ना जाए हमारा संसार ।
मगर वो हठी दौड़ पड़ा  ....... उन गाड़ियों के बीच से ,
पकड़ने उस नादान को  …… जो दौड़ रहा था आँखें मीच के ।

सड़क पार करके  … उसने बढ़ाया अपना हाथ ,
और पंखों से पकड़ उस नादान को .......... ले आया अपने साथ ,
फिर छोड़ दिया उसे  …… उसी के अपनों के बीच ,
जहाँ बहुत से कबूतर चुग रहे थे दाना  …… सबका ध्यान अपनी ओर खींच ।

एक ज़िंदगी आज खुश थी बहुत  ....... एक ज़िंदगी के प्राणों को बचा ,
एक ज़िंदगी आज खुश थी बहुत  ....... खुद को अपनों के बीच पा ।।

This Hindi poem highlights the scene of a hearty person that how He managed to save a small pigeon on the busy street road and put His life in danger.

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Writing by

Praveen Gola

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