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writingEk Qataa

आना-जाना अगर फितरत है हर शै की यहाँ
क्यों दुखों को जाते, ना खुशियों को आते देखा

 

रंज-ओ-मसाइब से बिलखती इस दुनिया में...
चंद दीवानों को मैंने बे-वजह मुस्कुराते देखा !!

 

 

रंज-ओ-मसाइब: दुःख-दर्द

चंद दीवानों को मैंने बे-वजह मुस्कुराते देखा ...

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