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writingDo pal ishq


दो पल का था वह प्रितिकर एहसास
फिर हो चला अपने रास्तों का आभास

तेरी मुस्करहट पर मरते हुए
तेरी आँखों से नमाज़ पढ़ते हुए
और कुछ न हमको भाया है
सारा जग तुझमे समाया है

दो पल की थी इश्क़ की सौगात
फिर हो चला अपने रास्तों का आभास

तेरे एक स्पर्श से तरते हुए
तेरी आँखों के दरिया में गोते लगाते हुए
वो करम खुदाया है
चाँद भी हमें देखकर मुस्काया है

दो पल की थी तारों की बारात
फिर हो चला अपने रास्तों का आभास

अविस्मरणीय किस्से गढ़ते हुए
ख़ामोशी से गुफ़्तगू करते हुए
किसी पुण्य का परिणाम आया है
जो तुझे मुझसे मिलाया है

दो पल की थी खुशियों की बरसात
फिर हो चला अपने रास्तों का आभास

रूठते और मनाते हुए
तुझे कविता का अलंकार मानते हुए
तू हर लम्हे में समाया है
इन लम्हों को यादगार बनाया है

दो पल में हमने कर दिया सब कुछ व्यक्त
फिर हो चला रास्तों का आभास

साथ-साथ चलते हुए
दुनिया की रस्मों में बंधते हुए
यह सितम हमपे ढाया है
तेरा-मेरा मज़हब अलग बनाया है

दो पल का था प्रितिकर एहसास
फिर हो चला अपने रास्तों का आभास

Do pal ishq

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Writing by

aanchal

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