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writingByan

       बयां
भंवरें ने कली को
धीरे से कुछ कहा
कोई ना सुन सका
लभों से कली के,
हुआ ना कुछ बयां
शर्मा के सिमट गयी वो
फिर खिल के फूल हो गयी वो
खुशबू से बाग़ महकने लगा
पंछी भी सारे चहकने लगे
चेहरे उदास सभी खिलने लगे
एक पल में, नज़ारे सभी बदलने लगे
शायद कुदरत का ही ये जादू है
दिल खुद हो जाता बेकाबू है
जोर इस पे किसी का चलता नहीं
हर किसी पे ये मचलता नहीं
                

This poem describes natural love and attraction.

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Writing by

Kishore

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