Follow Us
  • SIGN UP
  • tumbhi microsites
tumbhi microsites

writingAb vo zamana nhi rha

वो ज़माना

अब वो दोस्तों में दोस्ताना नही रहा,
गलतियों पर रूठने-मनाने का ज़माना नही रहा...

बन तो गए हैं दरों-दीवार कई यहां,
पर मोहब्बतों भरा का कोई आशियाना नही रहा...

महफिलें तो सजती हैं दुल्हन सी आज भी,
मगर इनमे कोई दोस्त अब पुराना नही रहा...

अब वो दोस्तों में दोस्ताना नही रहा,
गलतियों पर रूठने-मनाने का ज़माना नही रहा...

सब गुम हैं अपनी ही दुनिया में यहां,
ढूंढने को किसी का ठिकाना नही रहा...

अब वो दोस्तों में दोस्ताना नही रहा,
गलतियों पर रूठने-मनाने का ज़माना नही रहा...

-फरहाना फ़िरदौस
 

Changing time, changing dynamics of social terms..

Report Abuse

Please login to report abuse.
Click on the Report Abuse button if you find this item offensive or humiliating. The item will be deleted/blocked once approved by the admin.

View More from me

You May Also Like

GO