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writingAab sapane mein hee gaon jana hota hai

अब सपने में ही गाँव जाना होता है
कल सपने में गाँव गया था
अपने खेत में गेहूँ बो रहा था,
हल चलाते समय
हल का फल रूक गया था,
जैसे राजा जनक के साथ हुआ था।
धूप बहुत थी
बैलों को छाया में खड़ा कर
पानी पी रहा था,
खोयी वस्तु को खेत में खोज रहा था,
घर से आये खाने को उतावला था,
आखिर पेट की भूख मन की भूख से तेज होती है।
फिर एकाएक गेहूँ पक गये
और बंदर खेत में आ धमके,
मेरी लाठी छोटी थी
अतः उन तक पहुँच नहीं रही थी।
ओह, मेरा पहाड़ी गाँव
कितना बेबस हो चुका है,
घराट पर मिले लोग
बूढ़े हो चुके हैं,
घराट बंद हो चुके हैं,
ओहो, मेरा गांव कितना बदल गया है।
अचानक मैं अपनी प्रेम कहानी पर आता हूँ,
जिसे मेरे और उसके अलावा सब जानते हैं।
चाय के लिए बैठा हूँ
देश-विदेश की राजनीति उड़कर आने लगी है,
तूफान बनने लगे हैं
जो चाय की गिलास से उठ
चाय की गिलास में खत्म हो जाते हैं।
गाँव पंचायत बैठ गयी है
शराब के ठेकेदार शराब लाये हैं,
बोतलों का टकराव सुनायी दे रहा है
शराब खुली है, स्वतंत्र है,
प्रधान पीकर लुढ़क चुका है,
पंचायत में सन्नाटा है
खबर है इस साल पिछले साल से अधिक शराब बिकी है,
गालियां भी अधिक दी गयी हैं,
फिर भी सपने में संगीत सुनायी दे रहा है,
क्योंकि मेरा देश बदल रहा है।

*महेश रौतेला

अब सपने में ही गाँव जाना होता है कल सपने में गाँव गया था अपने खेत में गेहूँ बो रहा था, हल चलाते समय हल का फल रूक गया था, जैसे राजा जनक के साथ हुआ था।

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Writing by

MaheshRautela

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