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writing bas ek kami hai tumhari

बस इक तुम्हारी कमी है
बाकी सब पूरा है
ड्रेसिंग टेबल के शीशे पे लगी बिंदिया तुम्हारी
टेबल के दराज़ में रखी चुडिया तुम्हारी
बिस्तर के एक कोने में दबी घर की चाबिया तुम्हारी
तकिये पर रखा मोगरे का गजरा जिसमे बाकी है बस खुशबू तुम्हारी
सब कुछ तो है पर कुछ अच्छा नहीं लगता
मुजको अब ये घर अपना नहीं लगता
बैठक में रखी आराम कुर्सी पर आराम नहीं मिलता
बरामदे में लगा जुला अब कोई नहीं जुलता
तुमने अपने हाथो से जो लगाया था वो गुलाब अब नहीं खिलता
सब कुछ तो है पर कुछ अच्छा नहीं लगता
मुजको अब ये घर अपना नहीं लगता
ईट पत्थर की दीवारें है छत है पर घर अधुरा है
बस इक तुम्हारी कमी है बाकी सब पूरा है


 

jab jivan sathi sath nahi hota to ghar bhi ghar nahi rahta

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