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दीदार उनका जो हो गया था
दिल दीवाना ये खो गया था
फिर भी उनसे ना कह ये पाए
पयार उनसे ही हो गया था
दीदार उनका जो हो गया था।

निगाहे उनसे मिल गई थी
दिल की कलियां खिल गई थी
तीर आंखों से जो चलाया
होश मेरा यूं खो गया था
दीदार उनका जो हो गया था

होश संभाला तो मैंने जाना
बन ना जाए कोई फसाना
बात होठो मे  फिर दबा ली
रुसवाई का डर हो गया था
दीदार उनका जो हो गया था।

दिल की धड़कन खो रही थी
आंखें भी नम सी हो रही थी
मंजर था वह अजब निराला
मिल के भी वो खो गया था।
दीदार उनका जो हो गया था।

बात दिल कि मैं कह ना पाई
पास उनके भी रह ना पाई
याद अपनी उनहे बनाया
हिस्सा दिल का जो हो गया था
दीदार उनका जो हो गया था

Didar unka jo ho..

Poems Sher-o-shayari 0

ये जीवन व्यर्थ हो जाए नहीं हमको गवारा है
किसी के काम आए तो सफल जीवन हमारा है

नहीं उनको जरूरत है किसी के भी सहारे की
कि जिसको है यकी़ खुद पर जो अपना ही सहारा है
बहुत है लोग दुनिया में के जिनको आस है तुमसे
कि लाठी तुम बनो उनकी यहां जो बेसहारा है 
किसी के काम आए तो सफल जीवन हमारा है।

नहीं उनको जरूरत है किसी भी संगी साथी की
कि जिसको मिल गया है संग साथी भी प्यारा है
बहुत है लोग दुनिया में जो तनहा है अकेले से
कि साथी तुम बनो उनके तो उनका दिल तुम्हारा है
किसी के काम आए तो सफल जीवन हमारा है।

नहीं उनको जरूरत है किसी प्रकाश की लौ की
के जिनके मन हुए रोशन अंगना भी उजयारा है
बहुत है लोग दुनिया में जो  डरते हैं अंधेरे से
किरण एक रोशनी की दो लगे जीवन संवारा है
किसी के काम आए तो सफल जीवन हमारा है।

नहीं उनको जरूरत है किसी से ज्ञान लेने की
के जो विद्वान हैं खुद ही विद्या का पिटारा है
बहुत से लोग दुनिया में जो इच्छुक ज्ञान पाने के
दान विद्या का उनको दो जिन्हें ये ज्ञान प्यारा है
किसी के काम आए तो सफल जीवन हमारा है।

Kisi kae kaam aa..

Poems 0

सुबह   होते  ही  नाश्ते  की  दौड़
करते है  सब  काम  ताबड़तोड़
फिर  बच्चों  को  स्कूल  छोड़
उनको  ऑफिस  भेजने  की  लग  जाती  है  होड़

उस  पर  से  लंच  की  तैयारी का  जोर
सासु  माँ का  हर  काम  के  लिए  मचाना  शोर
इसी  भागम भाग  में संध्या  में  बदल  जाती है  उजली  भोर
थक  के  मन  थोड़ा  होने  लगता  है  कामचोर

फिर  चाय  की  प्याली  कामचोरी  को  लगाती  है  लगाम
कहती  है  अब  रात  के  खाने  का  बाकी  है  बस  काम
खिला  पिला  के  सबको  फिर जब लेते  है  सोने  का  नाम
तो बर्तन   कहते  है  मांज  लो  मुझको  फिर  करना  आराम

बस  यही  आखिरी  काम  लगता  है  भारी
फिर  अंतर्मन  यही  गुणगान  करता  है  कब  आएगी  सोने  की  बारी
शरीर के  लिए  आराम  का  वक़्त  निकाल काम  तो  सदा  रहेगा  जारी
पड़  गई  बीमार  तो  ना  लगेगी  किसी  को  प्यारी

वाह री भारतीय  नारी "तुझे सलाम" 
वाह री भारतीय  नारी "तुझे सलाम"

Bhartiye Naari

Poems 0

गुज़रा ज़माना
याद आया फिर मुझको वो गुज़रा ज़माना
वो पिट्ठू ,वो कंचै ,वो लट्टू घुमाना
नज़र फिर बचाकर वो  यूँ भाग जाना
छिप कर दबे पाँव ,वापिस घर को आना
याद आया फिर मुझको वो गुज़रा ज़माना ।
वो  गुड्डे और गुड़िया का बियाह रचाना
कभी डॉक्टर ,कभी  टीचर,कभी अम्मा बन जाना
कभी झूठै से रोना ,कभी बहानें बनाना
कभी  ज़िद  यह  पकड़ना नानी घर को जाना
याद आया फिर मुझको वो गुज़रा ज़माना ।
वो माँ  को जो  देखा ,झट से  घर समेटा
वो पानी थोड़ा फैंका और पोंछा घुमाया
वो भाई  से लड़कर ,पलंग के नीचे छिप जाना
फिर चुपकाए से आकर पढ़  कर  दिखाना 
याद आया फिर मुझको वो गुज़रा ज़माना ।
मामा जी का आना ,फिर  भुजिया ,बिस्किट लाना
और  जाते  ही उनकै, सब चट कर जाना
वो हसना,हँसाना,रूठना और मनाना
अच्छी सी चीज़  को, दिखा दिखा कर फिर खाना | 
याद आया फिर मुझको वो गुज़रा ज़माना ।
वो   बोरी  बिछाना ,मन   लगाकर  फिर पढ़ना 
थोड़ा  लड़ना  ,झगड़ना ,  आाँखे दिखाना
भाई  का , फिर हम  सब  को पढाना
घर का मस्ती की, फिर पाठशाला बन जाना |

Guzra Zamana

Poems 0

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