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Writing

अब उड़ चलो.........

तोड़ दो ये बेड़ियाँ , मजबूरियाँ ,

फैलाओ अपने पंख और अब उड़ चलो.

 

कुछ रोक सकता है नहीं जब ठान लो,

ना कोई रिश्ता, ना कोई  बंधन

देख लो अपना हुनर, ढून्ढ लो अपना करम

चीरते हुए हवाएं अब  उड़ चलो.

 

ख्वाब टूट सकता नहीं गर सोच लो,

ना कोई हलचल, ना उथल पुथल,                  

अरमानो को उबलने दो, ख्वाहिशे बहकने दो,

बुलंदियों को नाप लो अब उड़ चलो.

 

रास्ता मुश्किल नहीं गर चल पड़ो,

ना कोई हमसफ़र, ना रहगुज़र

दूरियों से ना डरो, बेफिक्रियों को साथ  लो,

रफ़्तार अपनी तेज़ कर बस उड़  चलो

 

मंज़िले दुष्कर नहीं जब प्रण करो,

ना रुकावटें, ना रंजिशे

उम्मीदों को बटोर लो, हौसले संभाल लो,

लक्ष्य अपना साध लो और उड़ चलो       

 

कुछ भी पा सकते हो गर तुम चाह लो,

ना कोई हदें, ना सरहदें

इक्छाओं को प्रबल करो, तमन्नाएं साथ लो,

फांद लो दीवार को और उड़ चलो

 

मत डरो, मत सहो, सामर्थ अपना जान लो,

उठा लो पहला कदम बस बढ़ चलो,

तोड़ दो ये बेड़ियाँ , मजबूरियाँ ,

फैलाओ अपने पंख और अब उड़ चलो.

                                           - DevB निशब्द        

Ab Udd Chalo

Poems 0

जब मन नहीं करता है कुछ करने का, तो लिखता हूँ मैं
जब मन करता है मन को छूने का, तो लिखता हूँ मैं।

ज़िंदगी से लड़ते-लड़ते, ज़िंदगी गुज़र जाती है
जब मन करता है कभी जीने का, तो लिखता हूँ मैं।

कोशिश करता हूँ लफ़्ज़ों से,
जज़्बात जता सकूँ, जज़्बात छुपा सकूँ
जब मन करता है तुझे याद करने का, तो लिखता हूँ मैं।

बिन बादल बरसात,
देखी है कभी, सुनी है कभी
जब मन करता है कभी भीगने का, तो लिखता हूँ मैं।

मन की गहराई,
जितनी गहरी है, उतनी सुनहरी है
जब मन करता है इसमें उतरने का, तो लिखता हूँ मैं।

आसमान में उड़ने की ख़्वाहिश,
हर परिंदे की बस यही ख़्वाहिश
जब मन करता है कभी उड़ने का, तो लिखता हूँ मैं।

हँसते हुये कैसे रोया जाये,
सोचा है कभी, किया है कभी
जब मन करता है ऐसा करने का, तो लिखता हूँ मैं।।

#RockShayar

Toh likhta hoon ..

Poems 0

जिन्दा हु मै हर इक सांस भारी है

साँस लेने की कोशिशे बदस्तूर जारी है 

जाने कब तलक चलेगा कारोबार सांसों का सट्टा बाज़ार में बोली जारी है

जो मौत जीती तो में हारा, जो जिंदगी तो में ही हारा

अजीब सा एक खेल जारी है

कल फिर सहर होगी इस शब के बाद, कल भी तो ऐसा ही हुआ था

शब सहर , सहर शब दुनियादारी है

आना जाना जाना आना जारी है

आज वोह सो ही गया, पिछली चोदह रातों से जागा था मै जीसके साथ

चाँद को नींद आ ही गयी

नींद को मेरी आँखों से कोई गिला भारी है 

रोज़ रोज़ एहसान जताना अच्छी बात नहीं 

मगर ये सच है, जिंदगी मेरी तुजसे वफादारी है 

कैसे भी हो जीये जाना जारी है

जिन्दा हु मै , जिन्दा हु मै, जिन्दा हु मै

 

JInda hu mein

Lyrics 1

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