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तलाश-ऐ-यार

ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको

इम्तिहान-ऐ-सब्र भी और गम-ऐ-दिल को खुशामदिन
चर्चा-ऐ-यार और शेखी मोहोब्बत की
कभी हम गुमशुदा तो कभी ये दिल गुमशुदा
हर जगह होती बातें ग़ुरबत की

ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको

न हसीं सवेरे की कहानी, न ढलते शाम का किस्सा
सबकी जुबां पर सिर्फ हमारे नाम का किस्सा
कोई समझता सोहरत-ऐ-इश्क़, कुछ ने मजहब-ऐ-दिल कहा इसको
किसी की निग़ाह में नफरत-ऐ-आंसू, किसी में खुसी का खज़ाना

ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको

दो पहलू दिखे इस मोहोब्बत के हमको
अच्छी और बुराई दोनों से पला पड़ा
कुछ ने डराया हमें सूली का नाम ले कर
कुछ ने हमें शक्श-ऐ-बुज़दिल कहा

ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको

अरमान-ऐ-दिल कुछ बैरंग मिले थे
कुछ खुवाइशों का जैसे इंतकाल हुआ
गुनाह-ऐ-खास था ये सबकी नज़र में
कुछ का फैसला हमारे हक़ में हुआ

ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको….!!

देव कुमार

Talaash e Yaar

Poems Sher-o-shayari 0

तारीफ़ माँ की
बचपन में तेरी उंगली पकड़कर चलना,
गोदी की पालकी में सुकून से पलना,
तेरी लोरी में चाँद तारों से मिलना,
तेरे दूर होते ही रोते-२ आंखें मलना,
तेरे साथ वो हंसना, खेलना और उछलना।

ईक बगल में बस्ता, ईक में मुझे उठाना,
आंचल में समेटकर स्कूल छोड़ के आना,
धीरे से मुझे बचपन के नाम से बुलाना,
मेरे आंखों में आंसू देखकर घबरा जाना,
सीने से लगाकर मेरे सिर को सहलाना।

गोदी में बिठाकर मुंह में बुर्कियां डालना,
तरह-२ के नुस्खों से मेरी नज़र उतारना,
रात को उठ-२ मेरे ऊपर चादर डालना,
कहीं जाने से पहले मेरे बालों को संवारना,
सोते वक़्त मेरे पीने के लिए दूध उबालना।

मेरी यादों की तिजौरी में तेरा ही खज़ाना है,
तेरी पलकों का अब हर ईक आंसू चुराना है,
दुनिया में सबसे खुबसूरत तेरा अफ़साना है,
माँ, तेरे बताए राह पर अब चलते ही जाना है,
अशीश को तूं खुदा का दिया नायाब नज़राना  है।

Taareef Maa ki

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